Bineshari Prasad @ Vindeshwari Sah @ Bindeshwari Prasad v. The State Of Bihar
IN THE HIGH COURT OF JUDICATURE AT PATNA
CRIMINAL MISCELLANEOUS No.51596 of 2023 Arising Out of PS. Case No.-220 Year-2020 Thana- SASARAM MUFFSIL District- Rohtas ====================================================== BINESHARI PRASAD @ VINDESHWARI SAH @ BINDESHWARI PRASAD SON OF MAHAVIR PRASAD RESIDENT OF VILLAGEDHAWANI, PS- KARAKAT, DISTT- ROHTAS ... ... Petitioner/s
Versus
The State of Bihar BIHAR ... ... Opposite Party/s ====================================================== Appearance :
For the Petitioner/s :
Mr.Vijay Anand For the Opposite Party/s :
Mr.Yogendra Kumar ====================================================== CORAM: HONOURABLE MR. JUSTICE SANDEEP KUMAR ORAL ORDER 07-08-2023 Heard the parties.
This application has been filed for quashing the order dated 15.06.2023 passed by ADJ. IX, Sasaram at Rohtas in Sessions Trial No. 93 of 2023 arising out of Sasaram (Muffasil) P.S. Case No. 220 of 2020.
By the impugned order dated 15.06.2023 the discharge application of the petitioner has been rejected and the learned Additional Sessions Judge has held in Paragraph III and IV of the impugned order as follows:- "उभयपकक्षो कक्षो सुनना। सत्र वविचनारण विनाद 27/2022, जक्षो वक इससी घटनना से सम्बंधधित है और इससी न्यनायनालय म आज ककी वतधथि म लबंवबत है, म ससथित मूल विनाद दहैवनककी एविबं प्रसतसुत सत्र बनाद म पमूरक विनाद दहैवनककी कना
2/4 अविलक्षोकन वकयना। प्रनाथिवमककी कसे अविलक्षोकन से सपष्ट है वक प्रसतसुत मनामलना धिनारना 302 सहपवठित 34 भना०दबं०ववि० कसे अबंतरत कसुल - 4 अवभयसुकक्तों कसे वविरूद्ध दजर है, धजसम आविसेदक / अवभयसुक भसी ननावमत है। मूल विनाद दहैवनककी कसे कबंवडिकना-8 म समूचक कना पसुनबरयनान कबंवडिकना- 13,14,25 एविबं 26 म सनावकयक्तों कना बयनान विवणरत है, धजसम उनकसे दनारना अवभयक्षोजन कथिनानक कना पमूणररूपसेण समथिरन वकयना रयना है तथिना घवटत घटनना म आविसेदक / अवभयसुक ककी सबंधलप्ततना ककी बनात सपष्ट रूप से कहसी रयसी है। इन सनावकयक्तों दनारना अपनसे बयनान म यह भसी कहना रयना वक जमसीन वविविनाद कसे कनारण समूचक कसे छक्षोटसे लड़कसे ककी हत्यना कर दसी रयसी एविबं सनाधजश कसे तहत उक हत्यना कक्षो सड़क दसुघरटनना वदखनानसे कना प्रयनास वकयना रयना। इसकसे अवतररक इन सनावकयक्तों नसे अपनसे बयनान यह भसी अवभकधथित वकयना, वक मृतक कसे शरसीर पर कक्षोई बनाहरसी जख्म वदखनाई नहहीं दसे रहना थिना तथिना मृतक कसे मक्षोटरसनाईवकल एविबं हसेलमसेट म वकससी प्रकनार कना कक्षोई खरक्तोंच नहहीं थिना, इससे सपष्ट है वक मृतक ककी मृत्यसु सडिक दसुघरटनना म नहहीं हई। मूल बनाद दहैवनककी ककी कबंवडिकना-60 म मृतक कना अबंत्य परसीकण प्रवतविसेदन विवणरत है, धजसम मृतक कसे मृत्यसु कना कनारण "हनाईपक्षो पहैथिक्षो ललॉधजकल परसीकण" से कहैवमकल ररपक्षोटर कसे प्रनाप्त हक्षो जनानसे पर वनधिनारररत वकयसे जनानसे कना तथ्य विवणरत है। विनाद दहैवनककी कसे कबंवडिकना-63 म ननावमत दक्षो सह-अवभयसुकक्तों कसे वविरूद्ध घटनना सत्य पनातसे हए, धिनारना 302,201 / 34
3/4 भना०द०ववि० कसे अबंतरत आरक्षोप-पत्र समवपरत वकयना रयना तथिना वितरमनान म इन दक्षोनक्तों सहअवभयसुकक्तों कसे वविरूद्ध विवणरत धिनारनाओबं म आरक्षोप कना रठिन कर अवभयक्षोजन सनाक्ष्य क्रम म सत्र वविचनारण सबं0-27 / 2022 कसे रूप म लबंवबत है। आविसेदक कसे वविरुद्ध अनसुसबंधिनान जनारसी रखना रयना है। पमूरक विनाद दहैवनककी कसे कबंवडिकना-97 म आविसेदक / अवभयसुक कसे वविरुद्ध भसी कनाबंडि कक्षो सत्य पनातसे हए, विवणरत धिनारनाओबं कसे अबंतरत पमूरक आरक्षोप-पत्र समवपरत वकयना जना चसुकना है। वविधधि कना यह प्रवतपनावदत धसद्धनाबंत है वक आरक्षोप रठिन कसे सतर पर उपलब्धि सनामवग्रियक्तों कना समूक्ष्म परसीकण रसुण-दक्षोष कसे आधिनार पर नहहीं वकयना जनाए, अवपतसु उपलब्धि सनामग्रिसी कसे दनारना प्रथिम दृष्टना मनामलना आविसेदक / अवभयसुक कसे वविरुद्ध बनतना है यना नहहीं, यह हसी पयनारप्त है। यह अच्छसी तरह से सथिनावपत है वक मसुकदमसे ककी शसुरूआत और प्रनारबंवभक चरण म अवभयक्षोजन पक जक्षो सबमूत पसेश करनना चनाहतसे ह, उसककी सत्यतना औरसनाक्ष्य कक्षो आरक्षोप रठिन कसे सतर पर समूक्ष्मतना एविबं रसुण-दक्षोष कसे आधिनार पर नहहीं आबंकना जनानना चनावहए। न्यनायनालय यह नहहीं दसेखसेरना वक अवभयसुक ककी दक्षोषधसवद्ध कसे धलए पयनारप्त आधिनार है यना नहहीं यना यवद अवभयसुक कसे वविरुद्ध सनाक्ष्य है, तक्षो क्यना मसुकदम कना दक्षोषधसवद्ध म समनाग्रि हक्षोनना वनसशचत है, बसलक न्यनायनालय प्रथिम दृष्टना यह मनान सकतना है वक आविसेदक / अवभयसुक कसे वविरूद्ध मनामलना ममौजमूद है और यह भसी मनानना जना सकतना है वक आरक्षोपसी नसे अपरनाधि वकयना है।
4/4 वितरमनान मनामलसे म समूचक और रविनाहक्तों नसे अवभयक्षोजन मनामलसे कना समथिरन और पसुवष्ट ककी है और आविसेदक / अवभयसुक कसे वविरूद्ध अवभयक्षोजन कसे मनामलसे कक्षो सहसी पनातसे हए पमूरक आरक्षोप-पत्र समवपरत वकयना है। मसेरसे वविचनार से उपरक्षोक सभसी विवणरत धिनारनाओबं म आविसेदक / अवभयसुक कसे धखलनाफ प्रथिम दृष्टना मनामलना बनतना है।"
From reading of the aforesaid, it appears that after filing of the discharge application, the petitioner has been heard and thereafter by a detailed order the discharge application of the petitioner has been rejected considering all the grounds raised by the petitioner.
In view of the above, I find no merit in this application.
Accordingly, this application is dismissed.
(Sandeep Kumar, J) Vikas/- U T